kabhi aañsu kabhi KHvaabon ke dhaare toot jaate hain | कभी आँसू कभी ख़्वाबों के धारे टूट जाते हैं

  - Dinesh Thakur
कभीआँसूकभीख़्वाबोंकेधारेटूटजातेहैं
ज़रासीआँखमेंक्याक्यानज़ारेटूटजातेहैं
हवाभीआज-कलरखतीहैतेवरपत्थरोंजैसे
यहाँतोसोचसेपहलेइशारेटूटजातेहैं
हमेंतन्हाइयोंमेंयूँँसदाएँकौनदेताहै
समुंदरकाँपउठताहैकिनारेटूटजातेहैं
पस-ए-दीवारछुपजातेहैंजोतूफ़ानसेडरकर
उन्हींकीज़िंदगीमेंसबसहारेटूटजातेहैं
जबींपरकौनसीतहरीरलिक्खीहैख़ुदाजाने
हमारेपासकरक्यूँँसितारेटूटजातेहैं
  - Dinesh Thakur
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