aap jab bhi k | आप जब भी कभी मुस्कुराने लगे

  - Dilshad Naseem
आपजबभीकभीमुस्कुरानेलगे
दर्दजितनेथेमेरेसुहानेलगे
रातपूरीखड़ीहैअभीसहनमें
तारेमुझकोअभीसेजगानेलगे
ख़्वाबजलतेहुएरखदिएराहपर
बे-सहाराथेवोसबठिकानेलगे
इसक़दरजानकोहोरहाथामलाल
आपरूठेनहींहममनानेलगे
अबकेशायदवोआएगाइसशहरमें
बामपरहमदिएतोजलानेलगे
बहगयाआँखसेमेराकाजलतोफिर
रंज-ओ-ग़मदिलकेसबहीछुपानेलगे
इसक़दरमेहरबाँवोकहाँमुझपेथे
जिसक़दरवोमुझेअबजतानेलगे
  - Dilshad Naseem
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