KHud apni aag men saare charaaghh jalte hain | ख़ुद अपनी आग में सारे चराग़ जलते हैं

  - Dilawar Ali Aazar
ख़ुदअपनीआगमेंसारेचराग़जलतेहैं
येकिसहवासेहमारेचराग़जलतेहैं
जहाँउतरताहैवोमाहताबपानीमें
वहींकिनारेकिनारेचराग़जलतेहैं
तमामरौशनीसूरजसेमुस्तआ'रनहीं
कहींकहींतोहमारेचराग़जलतेहैं
तुम्हाराअक्सहैयाआफ़्ताबकापरतव
येख़ाल-ओ-ख़दहैंकिप्यारेचराग़जलतेहैं
अजीबरातउतारीगईमोहब्बतपर
हमारीआँखेंतुम्हारेचराग़जलतेहैं
मिरीनिगाहसेरौशननिगार-खाना-ए-हुस्न
मिरेलहूकेसहारेचराग़जलतेहैं
जानेकौनसीमंज़िलहैमुंतज़िर'आज़र'
किरहगुज़रमेंसितारेचराग़जलतेहैं
  - Dilawar Ali Aazar
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