to kya raabta phir KHuda ka bashar se | तो क्या राब्ता फिर ख़ुदा का बशर से

  - Deepak Purohit
तोक्याराब्ताफिरख़ुदाकाबशरसे
तअ'ल्लुक़नहींजबदु'आकाअसरसे
जोपूछाहवासेक्यूँँमहकीहुईहो
कहाउसनेआईहूँहोकरउधरसे
रह-ए-इश्क़दुश्वारहैकिसक़दरये
कभीपूछदेखोतोमुझदर-ब-दरसे
यूँँमहव-ए-सफ़रहूँतिरीजुस्तुजूमें
नज़रमेरीआगेहैशम्स-ओ-क़मरसे
रहाबे-ख़बरअहल-ए-ग़ुर्बतकेग़मसे
सोख़ुदगिररहाहूँमैंअपनीनज़रसे
किमाँख़्वाबमेंमाथासहलारहीथी
डरूँक्यामैंअबबद-दुआ'बद-नज़रसे
  - Deepak Purohit
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