main muddat se tiri aamad ka yuñ aalam sajaaye hooñ | मैं मुद्दत से तिरी आमद का यूँँ आलम सजाए हूँ

  - Deepak Purohit
मैंमुद्दतसेतिरीआमदकायूँँआलमसजाएहूँ
अजबहैबे-ख़ुदीदहलीज़पेनज़रेंजमाएहूँ
हुईतारीकियाँरुख़्सतमुनव्वरज़ीस्तहैमेरी
तुम्हारीयादकेजुगनूमैंपलकोंपरसजाएहूँ
फिरायादर-ब-दरबे-कलजहाँमेंख़्वाब-ओ-ख़्वाहिशने
मुसलसलहैसुकूँअरमान-ओ-हसरतकोमिटाएहूँ
महकतीकैफ़ियतसेहैमोअ'त्तरज़िंदगीमेरी
तुम्हारीरूहकीख़ुशबूमेंसाँसोंमेंबसाएहूँ
घनेख़ुद-ग़र्ज़ी-ओ-मतलब-परस्तीकेअँधेरोंमें
वसीअ'इमदादऔरख़िदमातकीशमएँजलाएहूँ
  - Deepak Purohit
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