tire nigah-e-karam jab bikhar gaii hogii | तिरे निगाह-ए-करम जब बिखर गई होगी

  - Daur Afridi
तिरेनिगाह-ए-करमजबबिखरगईहोगी
किसीग़रीबकीदुनियासँवरगईहोगी
तुझीकोढूँढतीफिरतीहैंदर-ब-दरआँखें
अज़लकेरोज़तुझीपरनज़रगईहोगी
सुकूत-ए-साज़-ए-दो-आलमसुनाईदेताहै
तिरेफ़िराक़मेंदुनियाठहरगईहोगी
सहरकेचाहनेवालेकाक्याहुआहोगा
ब-नाम-ए-तीरा-शबीजबसहरगईहोगी
वोइकख़बरकिजोरुस्वाइयोंकाबाइ'सेथी
हज़ाररंगमेंवोइकख़बरगईहोगी
सहरकेनर्म-ओ-ख़ुनुकदूधियाउजालोंमें
तिरेजमालकीरंगतबिखरगईहोगी
येशश-जिहतहैतिरेक़ातिलोंकादेसतोफिर
तिरेख़ुलूसकीअर्थीकिधरगईहोगी
  - Daur Afridi
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