ख़िज़ाँकाज़िक्रनज़िक्र-ए-बहारकरतेरहे
तुझीकोतेरीनिगाहोंसेप्यारकरतेरहे
मता-ए-दर्दकिबढ़तीरहीनजानेक्यूँ
इलाज-ए-दर्दमिरेग़म-गुसारकरतेरहे
दयार-ए-हुस्नकेजल्वेथेख़ूब-तरलेकिन
मिरीनज़रकेलिएइंतिज़ारकरतेरहे
मुझेतोरक़्स-ए-मसाइबभीरासआनसके
वोबज़्म-हा-ए-सुरूद-ओ-सितारकरतेरहे
कभीयक़ीन-ए-मोहब्बतनथानहैलेकिन
फ़रेब-ख़ुर्दातिराए'तिबारकरतेरहे