tumheen to aayi ho saj-dhaj ke jalva-gar hone | तुम्हीं तो आई हो सज-धज के जल्वा-गर होने

  - Daud Ghazi
तुम्हींतोआईहोसज-धजकेजल्वा-गरहोने
तुम्हींखड़ीहोलब-ए-बामदेखताहूँमैं
कुछऔरदेरज़रातुमवहींखड़ीरहना
नशात-ए-दीदकाहंगामदेखताहूँमैं
तुम्हाराहुस्नहैगोयानिखारफूलोंका
हरइकअदापेतुम्हारीनिसारजान-ओ-दिल
वफ़ाकेनामपेमरनाभीमुझकोआताहै
सहारादेदोमुझेतुमकिदूरहैमंज़िल
तुम्हेंयेकैसेमैंसमझाऊँसबा-अंदाज़
किमैंतुम्हारीअदाओंपेजानदेताहूँ
पहुँचहीजाऊँगाआख़िरतुम्हारेआँचलतक
क़समतुम्हारीतुम्हेंमैंज़बानदेताहूँ
येजानताहूँकिहैंख़ाररहगुज़ारोंमें
ज़मानाआयाहैहम-फ़ितरत-ए-सितमबनकर
हरइकसितमकोमैंसहलूँगाकाशतुमकुछदेर
वहींखड़ीरहोगुलदस्ता-ए-करमबनकर
तुम्हारीआँखोंमेंहोइंतिज़ारकाकाजल
तोमेरेसामनेराहोंकेपेच-ओ-ख़मक्याहैं
तुम्हारेलुत्फ़कीशमएँअगरफ़रोज़ाँहों
तोतीरगी-ए-सितमसरसर-ए-अलमक्याहैं
फ़िराक़-ओ-ग़मकेअँधेरोंमेंलड़खड़ातेहुए
तुम्हारेपासमैंबाला-ए-बामआउँगा
बनाकेनज़्म-ए-कुहनकोग़ुबार-ए-राहगुज़र
लिएहुएमैंनईसुब्ह-ओ-शामआउँगा
  - Daud Ghazi
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