mizaaj-e-aalam-e-imkaan hai barham dekhiye kya ho | मिज़ाज-ए-आलम-ए-इम्काँ है बरहम देखिए क्या हो

  - Daud Ghazi
मिज़ाज-ए-आलम-ए-इम्काँहैबरहमदेखिएक्याहो
सितम-कशपै-ब-पैहोतेहैंबाहमदेखिएक्याहो
गएवोदिनकिआवाज़ोंपेख़ामोशीकापहराथा
ब-हरसूगूँजताहैसोज़-ए-पैहमदेखिएक्याहो
येकैसारंग-ए-महफ़िलहैपरेशाँहैबहुतसाक़ी
बनेबैठेहैंसबमय-ख़्वारहमदमदेखिएक्याहो
चमनमेंरंगलाएगीसबाकीआबला-पाई
पिलातीहैलहूशाख़ोंकोशबनमदेखिएक्याहो
नज़रटकरारहीहैअबशुआ'-ए-मेहर-ए-ताबाँसे
हुईहैख़ुश्ककबकीचश्म-ए-पुर-नमदेखिएक्याहो
रह-ए-ग़ममुख़्तसरकरदीहैबज़्म-ए-ना-शकेबाने
हुएहैंमंज़िलोंकेफ़ासलेकमदेखिएक्याहो
  - Daud Ghazi
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