gham-e-hayaat men jaise bhi zindagi ki hai | ग़म-ए-हयात में जैसे भी ज़िंदगी की है

  - Daud Ghazi
ग़म-ए-हयातमेंजैसेभीज़िंदगीकीहै
तुम्हारीयादतोलेकिनकभीकभीकीहै
जोग़ममिलाथातोयेचाहाग़म-ए-ज़ियादमिले
सियाहशबमेंतमन्ना-ए-रौशनीकीहै
हयातसाथमेंलाईहैमौतकासामाँ
किसीनेहमसेबहुतख़ूबदिल-लगीकीहै
येग़मकीरातनहींजिसकीइंतिहाकोई
तिरेबग़ैरबसरकुछअजीबसीकीहै
निगाह-ए-यारकाइसमेंकोईक़ुसूरनहीं
किहमनेदिलकीख़राबीतोआपहीकीहै
  - Daud Ghazi
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