aa ke saahil ke qareen jaata hooñ saahil se pare | आ के साहिल के क़रीं जाता हूँ साहिल से परे

  - Daud Ghazi
केसाहिलकेक़रींजाताहूँसाहिलसेपरे
केमंज़िलपरचलाजाताहूँमंज़िलसेपरे
अपनीमंज़िलपरपहुँचकरसोचनेलगताहूँमैं
उफ़रेवोमंज़रसुहानाहैजोमंज़िलसेपरे
देखवोलहरोंकामंज़रदेखवोतूफ़ाँकाखेल
देखसाहिल-नशींक्याशयहैसाहिलसेपरे
रात-दिनदेतीहीरहतीहैतिरेजलवोेंकालुत्फ़
वोजोइकतस्वीररक्खीहैकहींदिलसेपरे
देखशौक़-ए-नज़रनज़्ज़ारा-हा-ए-दिल-फ़रेब
पर्दा-हा-ए-जुरअत-आमोज़उसकेमहमिलसेपरे
  - Daud Ghazi
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