jazba-e-nau bhi to hai hasrat-e-naakaam ke saath | जज़्बा-ए-नौ भी तो है हसरत-ए-नाकाम के साथ

  - Daud Ghazi
जज़्बा-ए-नौभीतोहैहसरत-ए-नाकामकेसाथ
ख़्वाहिश-ए-सुब्हउभरतीतोहैहरशामकेसाथ
होवोतहसीनकेहमराहकिदुश्नामकेसाथ
तोजाताहैमिरानामतिरेनामकेसाथ
तेरेकूचेसेभीगुज़राहूँमैंहुस्न-ए-तलब
सुब्हकेसाथकभीऔरकभीशामकेसाथ
मुश्किलेंराहमेंआतीतोबहुतहैंलेकिन
यादकरलेताहूँमैंतुझकोहरइकगामकेसाथ
पहलेमेराथायेग़मअबहैज़मानेभरका
ग़मभीगर्दिशमेंरहागर्दिश-ए-अय्यामकेसाथ
झूमतीआतीहैख़ुशबूसेभरीआतीहै
जबभीआतीहैसबाआपकेपैग़ामकेसाथ
  - Daud Ghazi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy