gham-e-duniya nahin phir kaun sa gham hai ham ko | ग़म-ए-दुनिया नहीं फिर कौन सा ग़म है हम को

  - Dattatriya Kaifi
ग़म-ए-दुनियानहींफिरकौनसाग़महैहमको
फ़िक्र-ओ-अंदेशा-ए-उक़बासभीरमहैहमको
दहन-ए-ग़ुन्चासेपैग़ाम-ए-वफ़ासुनतेहैं
ग़ाज़ा-ए-आरिज़-ए-सद-हस्त-ए-अदमहैहमको
क़ौलयेसचहैकिख़ुद-कर्दाकादरमाँक्याहै
दावर-ए-हश्रपेनाहक़काभरमहैहमको
अगलेलुक़्मोंमेंनहींक़ंद-ए-मुकर्ररकामज़ा
सख़्तबे-लुत्फ़-ए-हयात-ए-पैहमहैहमको
ज़ीस्तकीकश्मकशऔरमर्गकीक़ुर्बतकाअलम
आमद-ओ-रफ़्त-ए-नफ़सतेग़-ए-दो-दमहैहमको
बैठेबैठेजोकटेफिरतग-ओ-दौसेहासिल
हर-नफ़सजादा-ए-हस्तीमेंक़दमहैहमको
ज़र्रेज़र्रेमेंनज़रआतीहैतस्वीर-ए-सनम
सर-ब-सररू-कश-ए-सद-दैर-ओ-हरमहैहमको
बार-ए-ग़मबारसेएहसाँकेबदलजाताहै
तौक़-ए-गर्दनकशिश-ए-काफ़-ए-करमहैहमको
हाल-ए-दिललिखतेलोगोंकीज़बाँमेंपड़ते
वज्ह-ए-अंगुश्त-नुमाईयेक़लमहैहमको
आँखक्याडालिएउसगुलपेजोकुम्हलाजाए
'कैफ़ी'अपनाहीयेदिलबाग़-ए-इरमहैहमको
  - Dattatriya Kaifi
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