rah gaya raah men jab kuchh bhi na kaanton ke siva | रह गया राह में जब कुछ भी न काँटों के सिवा

  - Darshan Singh
रहगयाराहमेंजबकुछभीकाँटोंकेसिवा
तीरगीझूटकीजबछागईसच्चाईपर
उफ़ुक़-ए-ज़िंदा-ओ-पाइंदा-ए-ननकानासे
हँसपड़ीएककिरनवक़्तकीतन्हाईपर
दिलकेसुनसानखंडरमेंकोईनग़्माजागा
आँखमलतीहुईइकसुब्हबयाबाँसेउठी
फ़िक्रआज़ादहुईज़ेहनकेजालेटूटे
औरईक़ानकीलौसीना-ए-इंसाँसेउठी
ज़हरमेंडूबगईथींजोज़बानेंयकसर
उनपेशीरीनी-ए-वहदतकेतरानेआए
जिस्ममरताहैमगररूहकहाँमरतीहै
रूहइकनूरहैऔरजिस्मथिरकतेसाए
जिस्मकाँटोंसेगुज़रताहैगुज़रजानेदो
रूहवोफूलहैजिसपरख़िज़ाँआएगी
रूहपीलेगीजोइर्फ़ान-ओ-मुहब्बतकीशराब
मस्ती-ओ-कैफ़हमेशाकेलिएपाएगी
पीर-ए-नंगानातिरीरूह-ए-सदाक़तकोसलाम
जावेदाँपरचम-ए-उल्फ़ततिरालहराताहै
  - Darshan Singh
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