gham-e-hayaat pe khandaan hain tere deewane | ग़म-ए-हयात पे ख़ंदाँ हैं तेरे दीवाने

  - Darshan Singh
ग़म-ए-हयातपेख़ंदाँहैंतेरेदीवाने
अजीबसाहब-ए-इरफ़ाँहैंतेरेदीवाने
हरएकज़र्रा-ए-सहराहैआईना-ख़ाना
हुजूम-ए-जल्वासेहैराँहैंतेरेदीवानेदीवाने
अपनेहोशकीपर्वाअपनेदर्दकाफ़िक्र
ग़म-ए-ज़मींसेपरेशाँहैंतेरेदीवाने
कहाँयेहोशकिऔरोंकीज़िंदगीपेहँसें
ख़ुदअपनेहालपेख़ंदाँहैंतेरेदीवाने
हुजूम-ए-अश्कमेंछलकारहेहैंपैमाना
हरीफ़-ए-गर्दिश-ए-दौराँहैंतेरेदीवाने
बहारआतेहीक्याजानेउनपेक्यागुज़री
किख़ुदसेदस्त-ओ-गरेबाँहैंतेरेदीवाने
कभीतोइकनिगह-ए-जाँ-नवाज़होजाए
हनूज़कुश्ता-ए-अरमाँहैंतेरेदीवाने
निशात-ओ-दर्दमेंदेखाहैमैंने'दर्शन'को
हरएकहालमेंशादाँहैंतेरेदीवाने
  - Darshan Singh
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