raaz ye mujh pe aashkaara hai | राज़ ये मुझ पे आश्कारा है इश्क़ शबनम नहीं शरारा है

  - Darshan Singh
राज़येमुझपेआश्काराहैइश्क़शबनमनहींशराराहै
इकनिगाह-ए-करमफिरउसकेबा'द
उम्रभरकासितमगवाराहै
रक़्समेंहैंजोसाग़र-ओ-मीना
किसकीनज़रोंकायेइशाराहै
ऐसीमंज़िलपेगयाहूँजहाँ
तिरेग़मकाहीइकसहाराहै
लौटआएहैंयारकेदरसे
वक़्तनेजबहमेंपुकाराहै
दिलटूटेतोज़र्रा-ए-नाचीज़
कीमियाहैजोपारापाराहै
जाम-ए-रंगींमेंउनकाअक्स-ए-जमाल
याशफ़क़मेंकोईसिताराहै
नावटुकड़ेहुईहैतूफ़ाँसे
अबतोमुर्शिदकाहीसहाराहै
इश्क़करनाहैमातखाजाना
उसमेंजीताहुआभीहाराहै
अपनेदर्शनपेइकनिगाह-ए-करम
वोग़म-ए-ज़िंदगीकामाराहै
  - Darshan Singh
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