yoonhi jalaae chalo dosto bharam ke charaaghh | यूँँही जलाए चलो दोस्तो भरम के चराग़

  - D. Raj Kanwal
यूँँहीजलाएचलोदोस्तोभरमकेचराग़
किरहजाएँकहींबुझकेयेअलमकेचराग़
हरएकसम्तअँधेराहैहूँकाआलमहै
जलाओख़ूबजलाओनदीमजमकेचराग़
जहाँमेंढूँडतेफिरतेहैंअबख़ुशीकीकिरन
कहाथाकिसनेजलाओहुज़ूरग़मकेचराग़
वफ़ाकाएकहीझोंकासहसकेज़ालिम
तिरीतरहहीयेनिकलेतेरीक़समकेचराग़
बुझादिएहैंवहींगर्दिश-ए-ज़मानाने
जलाएजिसनेजहाँभीकहींसितमकेचराग़
उन्हींसेमिलतीरहीमंज़िलोंकीलौमुझको
बहुतहीकामकेनिकलेरह-ए-अदमकेचराग़
'कँवल'उन्हींसेमिलेरौशनीकहींशायद
जलारहाहूँयहीसोचकरक़लमकेचराग़
  - D. Raj Kanwal
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