log jin ko aaj tak baar-e-garaan samjha ki.e | लोग जिन को आज तक बार-ए-गराँ समझा किए

  - D. Raj Kanwal
लोगजिनकोआजतकबार-ए-गराँसमझाकिए
हमउन्हींलम्होंकोउम्र-ए-जावेदाँसमझाकिए
मौतकोहमज़िंदगीकीतर्जुमाँसमझाकिए
क़तरा-ए-दरियाकोबहर-ए-बे-कराँसमझाकिए
गोहक़ीक़तहीहक़ीक़तथीसरापाहममगर
ज़िंदगीकोदास्ताँहीदास्ताँसमझाकिए
हसरत-ए-सैर-ए-गुलिस्ताँख़्वाबबनकररहगई
वोक़फ़सनिकलाजिसेहमआशियाँसमझाकिए
हाँवहीइकशख़्सनिकलाबे-मुरव्वतबे-वफ़ा
हमजिसेजान-ए-तमन्नाजान-ए-जाँसमझाकिए
होगएइकबारफिरहमख़ुद-फ़रेबीकेशिकार
वोज़मींनिकलीजिसेहमआसमाँसमझाकिए
हाएवोनिकलींमुनज़्ज़मरहज़नोंकीटोलियाँ
आजतकजिनको'कँवल'हमकारवाँसमझाकिए
  - D. Raj Kanwal
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