nazaron ke gird yuñ to koi dayra na tha | नज़रों के गिर्द यूँँ तो कोई दायरा न था

  - D. Raj Kanwal
नज़रोंकेगिर्दयूँँतोकोईदायराथा
अपनेसिवाएकुछभीमगरसूझताथा
सबखिड़कियाँथींबंदकोईदरखुलाथा
जातेकहाँकिख़ुदसेपरेरास्ताथा
क्याजानेकिसख़यालसेचुपहोकेरहगया
ऐसानहींकिग़ममुझेपहचानताथा
होंटोंकेपाससकाजामउम्र-भर
हालाँकिफ़ासलायेकोईफ़ासलाथा
वोजिसनेज़िंदगीकामिरीरुख़बदलदिया
वोआपथेहुज़ूरकोईदूसराथा
पूछीकिसीनेराहतोचुपहोकेरहगए
कहतेभीक्याकिख़ुदहमेंअपनापताथा
अबकेकुछइसतरहसेभीआई'कँवल'बहार
सारेचमनमेंएकभीपत्ताहराथा
  - D. Raj Kanwal
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy