ham ko chheda to machal jaayenge armaan ki tarah | हम को छेड़ा तो मचल जाएँगे अरमाँ की तरह

  - D. Raj Kanwal
हमकोछेड़ातोमचलजाएँगेअरमाँकीतरह
हमपरेशाँहैंतिरीज़ुल्फ़-ए-परेशाँकीतरह
हरगलीआईनज़रकूचा-ए-जानाँकीतरह
हमकोदुनियायेलगीशहर-ए-निगाराँकीतरह
कमहोगीयेख़लिशदिलकीकिसीभीसूरत
दिलमेंसौग़महैंमकींख़ार-ए-मुग़ीलाँकीतरह
लोगरुकरुककेचलेजानिब-ए-मंज़िललेकिन
हमरहेगर्म-ए-सफ़रगर्दिश-ए-दौराँकीतरह
अबतोहरशख़्सपेहोताहैगुमाँक़ातिलका
कोईमिलताहीनहींआदमीइंसाँकीतरह
हमनेबख़्शेहैंअँधेरोंकोउजालेलेकिन
हमहीबे-नूररहेगोर-ए-ग़रीबाँकीतरह
हम'कँवल'आपमेंरहतेहैंमगरउससेअलग
हमतोगुलशनमेंभीरहतेहैंबयाबाँकीतरह
  - D. Raj Kanwal
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