khulti hai chaandni jahaan vo koi baam aur hai | खुलती है चाँदनी जहाँ वो कोई बाम और है

  - D. Raj Kanwal
खुलतीहैचाँदनीजहाँवोकोईबामऔरहै
दिलकोजहाँसुकूँमिलेवोतोमक़ामऔरहै
कहतीहैरूहजिस्मसेशायदतुझेख़बरनहीं
मेरामक़ामतूनहींमेरामक़ामऔरहै
सहमीहुईयेख़ामुशीहोंटोंकीतेरेकपकपी
कहतीहैसाफ़नामा-बरकुछतोपयामऔरहै
शिकवा-ए-बे-रुख़ीपेवोकहनेलगेकिदेखिए
नज़रोंकीबातऔरहैदिलकासलामऔरहै
पीतेरहेहैंउम्र-भरलेकिनवहीहैतिश्नगी
जिसकानशाहैजावेदाँवोकोईजामऔरहै
वक़्त-ए-गुनाहदेरतककहताहैमुझसेदिलमिरा
कार-ए-हयात-ए-इश्क़मेंतेरातोकामऔरहै
हरशयपेइसजहानकीपर्दाहैइकफ़रेबका
कहतेहैंसब'कँवल'मुझेगोमेरानामऔरहै
  - D. Raj Kanwal
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