fazaa men kaif-fashaan phir sahaab hai saaqi | फ़ज़ा में कैफ़-फ़शाँ फिर सहाब है साक़ी

  - Charkh Chinioti
फ़ज़ामेंकैफ़-फ़शाँफिरसहाबहैसाक़ी
फिरअपनेरंगपेदौर-ए-शबाबहैसाक़ी
येतल्ख़यादेंकम-अज़-कमभुलातोदेतीहै
शराबकुछभीहोआख़िरशराबहैसाक़ी
जोअपनीहस्तीकीमस्तीमिटाकेआताहै
तिरेहुज़ूरवहीबारयाबहैसाक़ी
ग़म-ए-फ़िराक़ग़म-ए-ज़िंदगीग़म-ए-दुनिया
शराबसारेग़मोंकाजवाबहैसाक़ी
तिरीनिगाहोंसेमयख़ानेजामभरतेहैं
तिरीनिगाहोंकाकोईजवाबहैसाक़ी
ब-क़ौल-ए-'चर्ख़'यहाँमस्तियाँउभरतीहैं
येमय-कदातोजहान-ए-शबाबहैसाक़ी
  - Charkh Chinioti
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