badan ko apni bisaat tak to paasarna tha | बदन को अपनी बिसात तक तो पसारना था

  - Chandra Parkash Shad
बदनकोअपनीबिसाततकतोपसारनाथा
हरएकशयकोलहूकेरस्तेगुज़ारनाथा
जिधरफ़सीलोंनेउसकोमोड़ायेमुड़गईहै
हवाकीमौजोंमेंकोईकौंदाउतारनाथा
तोक्यासबबसातपानियोंकोपीसकेहम
ख़ुदअपनाडूबाहुआजज़ीराउभारनाथा
मैंअपनेअंदरसिमटगयाएकलम्हाबनकर
कहींतोअपनेजनमकामंज़रगुज़ारनाथा
तुमगएक्यूँँवजूदकीयेबरातलेकर
हमेंतोअपनीरगोंमेंशमशानउतारनाथा
यहाँसेकटकरवोजाकेजंगलमेंसोगईहैं
उसीबहानेहवाओंकोखेलहारनाथा
ब्रिजटूटेआँखझपकीवक़्तबीता
जानेक्याकुछबिसरनाथाक्याबिसारनाथा
  - Chandra Parkash Shad
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy