hijrat ke baad aapse nafrat nahin hui | हिज्रत के बाद आपसे नफ़रत नहीं हुई

  - Shiv Sagar
हिज्रतकेबादआपसेनफ़रतनहींहुई
औरसंग-ए-ज़िन्दगीसेमोहब्बतनहींहुई
हमतोअभीजवानहैंपरहालवोहैकी
आगेकीफ़िक्रकरनेकीहिम्मतनहींहुई
हमहैंकिताबमेंदबेउसफूलकीतरह
बरवक़्तजिसकीतुमकोज़रूरतनहींहुई
हमतोअभीसेहिज्रकादुखड़ामनारहे
जबकीअभीमिलनकीइनायतनहींहुई
तेरेबिनाजानेकिधरजातीज़िंदगी
अच्छाहैज़िंदगीसेतूरुख़सतनहींहुई
मसनदपेबैठकेजोलताड़ेहमेंबुज़ुर्ग
अपनेसमयमेंउनसेबग़ावतनहींहुई
हिज्रतहुईऔरउसपेयेगुज़राहैसानिहा
कारणभीपूछनेकीइजाज़तनहींहुई
  - Shiv Sagar
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