ghaflat ka jo mizaaj tujhe shokhiyaan lage | ग़फ़लत का जो मिज़ाज तुझे शोखियाँ लगे

  - Shiv Sagar
ग़फ़लतकाजोमिज़ाजतुझेशोखियाँलगे
वोमेरेज़ब्त-ए-दिलकोकठिनइम्तेहाँलगे
जितनाभीदेखलेंतुझेउम्मीदसेमगर
चाहतविसाले-यारकीबसदास्तांलगे
वोहालथाहमारातिरेइंतज़ारमें
जाँपरखड़ेथेपाँवकेवांपरनिशांलगे
कहतेथेबाद-ए-हिज्रतुझेसुखमिलेमगर
दिलपेछुरीचलेतूअगरशादमांलगे
ज़ंजीर-ए-ज़िम्मेदारीनेजकड़ाहैइसक़दर
बर्बादियोंकीचाहभीअबरायगांलगे
परवाज़कौनतेरेमुक़ाबिलखड़ानहीं
हरसांसअबवफ़ाकीकोईइम्तेहाँलगे
  - Shiv Sagar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy