umeed haar chuke jazba-e-bagaavat bhi | उमीद हार चुके, जज़्बा-ए-बगावत भी

  - Shiv Sagar
उमीदहारचुके,जज़्बा-ए-बगावतभी
बदलपायगीहमकोतोअबमुहब्बतभी
जहाँनेतीरमलामतकेइतनेखींचेहैं
किअबतोबाइस-ए-ज़िल्लतहुईज़हानतभी
हमारेदुश्मनोंकेहालअपनेजैसेहैं
निभापारहेउनसेेहमअबअदावतभी
जहाँपेमिलतेथेहमदोनोंवोठिकानेअब
हमारेप्यारकीयादेंहैंऔरतुर्बतभी
हमेंतोगैरत-ए-दीवानगीनेमाराहै
अज़ाबलगनेलगीअबतेरीनज़ाकतभी
  - Shiv Sagar
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