har ik zarre se hai tabaani-e-shams-o-qamar paida | हर इक ज़र्रे से है ताबानी-ए-शम्स-ओ-क़मर पैदा

  - Baldev Raaj
हरइकज़र्रेसेहैताबानी-ए-शम्स-ओ-क़मरपैदा
हरइकआईनेसेहैसूरत-ए-आईना-गरपैदा
ज़मानाबंदकरदेताहैजिसपरइकदर-ए-इशरत
तोइसकेवास्तेकरतीहैफ़ितरतलाखदरपैदा
गदाओंकीनज़रमेंख़ाकहैतौक़ीर-ए-सुल्तानी
फ़ुसून-ए-इश्क़करदेताहैज़र्रोंमेंनज़रपैदा
नहींकुछदूरयेभीसूरमाक़ौमोंकीफ़ितरतसे
शिकस्तेंखाकेभीकरलेतेहैंफ़त्ह-ओ-ज़फ़रपैदा
जुनूँकोचाहिएँबे-ख़ौफ़-ओ-आ'ली-ज़र्फ़दीवाने
हरइकदीवारमेंज़िंदाँकीहोसकतेहैंदरपैदा
हक़ीक़तमेंख़िज़ाँता'मीरहैफ़स्ल-ए-बहारीकी
किदर्द-ए-सरसेहोतीहैदवा-ए-दर्द-ए-सरपैदा
  - Baldev Raaj
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy