gaaliyaan tankhwaah thehri hai agar bat jaayegi | गालियाँ तनख़्वाह ठहरी है अगर बट जाएगी

  - Bahadur Shah Zafar
गालियाँतनख़्वाहठहरीहैअगरबटजाएगी
आशिक़ोंकेघरमिठाईलबशकरबटजाएगी
रू-ब-रूगरहोगायूसुफ़औरतूजाएगा
उसकीजानिबसेज़ुलेख़ाकीनज़रबटजाएगी
रहज़नोंमेंनाज़-ओ-ग़म्ज़ाकीयेजिंस-ए-दीन-ओ-दिल
जूँमता-ए-बुर्दाआख़िरहम-दिगरबटजाएगी
होगाक्यागरबोलउट्ठेग़ैरबातोंमेंमिरी
फिरतबीअतमेरीबेदादगरबटजाएगी
दौलत-ए-दुनियानहींजानेकीहरगिज़तेरेसाथ
बादतेरेसबयहींबे-ख़बरबटजाएगी
करलेदिलजानकोभीरंज-ओ-ग़ममेंतूशरीक
येजोमेहनततुझपेहैकुछकुछमगरबटजाएगी
मूँगछातीपेजोदलतेहैंकिसीकीदेखना
जूतियोंमेंदालउनकी'ज़फ़र'बटजाएगी
  - Bahadur Shah Zafar
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