kya kahooñ dil maail-e-zulf-e-dota kyunkar hua | क्या कहूँ दिल माइल-ए-ज़ुल्फ़-ए-दोता क्यूँँकर हुआ

  - Bahadur Shah Zafar
क्याकहूँदिलमाइल-ए-ज़ुल्फ़-ए-दोताक्यूँँकरहुआ
येभलाचंगागिरफ़्तार-ए-बलाक्यूँँकरहुआ
जिनकोमेहराब-ब-इबादतहोख़म-ए-अबरू-ए-यार
उनकाकाबेमेंकहोसज्दाअदाक्यूँँकरहुआ
दीदा-ए-हैराँहमाराथातुम्हारेज़ेर-ए-पा
हमकोहैरतहैकिपैदानक़्श-ए-पाक्यूँँकरहुआ
नामा-बरख़तदेकेउसनौ-ख़तकोतूनेक्याकहा
क्याख़तातुझसेहुईऔरवोख़फ़ाक्यूँँकरहुआ
ख़ाकसारीक्याअजबखोवेअगरदिलकाग़ुबार
ख़ाकसेदेखोकिआईनासफ़ाक्यूँँकरहुआ
जिनकोयकताईकादा'वाथावोमिस्ल-ए-आईना
उनकोहैरतहैकिपैदादूसराक्यूँँकरहुआ
तेरेदाँतोंकेतसव्वुरसेथागरआब-दार
जोबहाआँसूवोदुर्र-ए-बे-बहाक्यूँँकरहुआ
जोहोनाथाहुआहमपरतुम्हारेइश्क़में
तुमनेइतनाभीपूछाक्याहुआक्यूँँकरहुआ
वोतोहैना-आश्नामशहूरआलममें'ज़फ़र'
परख़ुदाजानेवोतुझसेआश्नाक्यूँँकरहुआ
  - Bahadur Shah Zafar
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