vahii swaad-e-haram hai vahii hain but-khaane | वही स्वाद-ए-हरम है वही हैं बुत-ख़ाने

  - Badar Jamali
वहीस्वाद-ए-हरमहैवहीहैंबुत-ख़ाने
सुनाएजातेहैंउनवाँबदलकेअफ़्साने
हँसीख़ुदअपनीउड़ालेरहेहैंदीवाने
जुनूँकीकौनसीमंज़िलहैयेख़ुदाजाने
मआल-ए-शौक़सेअहल-ए-वफ़ाकोक्यामतलब
ब-जब्र-ए-इश्क़खिंचेरहेहैंपरवाने
वोजाँ-सिपारी-ए-परवानादिल-गुदाज़ी-ए-शम्अ'
हैंशबकोतल्ख़हक़ाएक़सहरकोअफ़्साने
ग़ुरूर-ए-हुस्न-ए-नज़रसेमुझेगिरासका
वफ़ाकीकौनसीमंज़िलहैयेख़ुदाजाने
जबींकेसाथ'जमाली'कादिलभीझुकताहै
कशिशसीहुस्न-ए-बुताँमेंहैक्याख़ुदाजाने
  - Badar Jamali
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