सुब्हऔरशामकेसबरंगहटाएहुएहैं
अपनीआवाज़कोतस्वीरबनाएहुएहैं
अबहमेंचाकपेरखयाख़स-ओ-ख़ाशाकसमझ
कूज़ा-गरहमतिरीआवाज़पेआएहुएहैं
हमनहींइतनेतही-चश्मकिरोभीनसकें
चंदआँसूअभीआँखोंमेंबचाएहुएहैं
हमनेख़ुदअपनीअदालतसेसज़ापाईहै
ज़ख़्मजितनेभीहैंअपनेहीकमाएहुएहैं
ऐख़ुदाभेजदेउम्मीदकीइकताज़ाकिरन
हमसर-ए-दस्त-ए-दुआहाथउठाएहुएहैं
हरनयालम्हाहमेंरौंदकेजाताहैकिहम
अपनीमुट्ठीमेंगयावक़्तछुपाएहुएहैं
एकमुद्दतहुईतुमआएनपैग़ामकोई
फिरभीकुछयूँँहैकिहमआसलगाएहुएहैं