subh aur shaam ke sab rang hat | सुब्ह और शाम के सब रंग हटाए हुए हैं

  - Aziz Nabeel
सुब्हऔरशामकेसबरंगहटाएहुएहैं
अपनीआवाज़कोतस्वीरबनाएहुएहैं
अबहमेंचाकपेरखयाख़स-ओ-ख़ाशाकसमझ
कूज़ा-गरहमतिरीआवाज़पेआएहुएहैं
हमनहींइतनेतही-चश्मकिरोभीसकें
चंदआँसूअभीआँखोंमेंबचाएहुएहैं
हमनेख़ुदअपनीअदालतसेसज़ापाईहै
ज़ख़्मजितनेभीहैंअपनेहीकमाएहुएहैं
ख़ुदाभेजदेउम्मीदकीइकताज़ाकिरन
हमसर-ए-दस्त-ए-दुआहाथउठाएहुएहैं
हरनयालम्हाहमेंरौंदकेजाताहैकिहम
अपनीमुट्ठीमेंगयावक़्तछुपाएहुएहैं
एकमुद्दतहुईतुमआएपैग़ामकोई
फिरभीकुछयूँँहैकिहमआसलगाएहुएहैं
  - Aziz Nabeel
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