parinde jheel par ik rabt-e-roohani men aa.e hain | परिंदे झील पर इक रब्त-ए-रूहानी में आए हैं

  - Aziz Nabeel
परिंदेझीलपरइकरब्त-ए-रूहानीमेंआएहैं
किसीबिछड़ेहुएमौसमकीहैरानीमेंआएहैं
मुसलसलधुँदहल्कीरौशनीभीगेहुएमंज़र
येकिनबरसीहुईआँखोंकीनिगरानीमेंआएहैं
कईसाहिलयहाँडूबेहैंऔरगिर्दाबटूटेहैं
कईतूफ़ानइसठहरेहुएपानीमेंआएहैं
मैंजिनलम्होंकेसाएमेंतुम्हारेपासपहुँचाहूँ
वोलम्हेसज्दाबनकरमेरीपेशानीमेंआएहैं
नज़रभरकरउसेदेखोतोयूँँमहसूसहोताहै
हज़ारोंरंगइकचेहरेकीताबानीमेंआएहैं
  - Aziz Nabeel
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