KHaak chehre pe mal raha hooñ main | ख़ाक चेहरे पे मल रहा हूँ मैं

  - Aziz Nabeel
ख़ाकचेहरेपेमलरहाहूँमैं
आसमाँसेनिकलरहाहूँमैं
चुपकेचुपकेवोपढ़रहाहैमुझे
धीरेधीरेबदलरहाहूँमैं
मैंनेसूरजसेदोस्तीकीहै
शामहोतेहीढलरहाहूँमैं
एकआतिश-कदाहैयेदुनिया
जिसमेंसदियोंसेजलरहाहूँमैं
रास्तोंनेक़बाएँसीलीहैं
अबसफ़रकोमचलरहाहूँमैं
अबमिरीजुस्तुजूकरेसहरा
अबसमुंदरपेचलरहाहूँमैं
ख़्वाबआँखोंमेंचुभरहेथे'नबील'
सोयेआँखेंबदलरहाहूँमैं
  - Aziz Nabeel
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