ye kis vehshat-zada lamhe men daakhil ho ga.e hain | ये किस वहशत-ज़दा लम्हे में दाख़िल हो गए हैं

  - Aziz Nabeel
येकिसवहशत-ज़दालम्हेमेंदाख़िलहोगएहैं
हमअपनेआपकेमद्द-ए-मुक़ाबिलहोगएहैं
कईचेहरेमिरीसोचोंसेज़ाइलहोगएहैं
कईलहजेमिरेलहजेमेंशामिलहोगएहैं
ख़ुदाकेनामसेतूफ़ानमेंकश्तीउतारी
भँवरजितनेसमुंदरमेंथे,साहिलहोगएहैं
वोकुछपलजिनकीठंडीछाँवमेंतुमहोहमारे
वहीकुछपलतोजीवनभरकाहासिलहोगएहैं
उलझतेजारहेहैंजुस्तुजूकेपरमुसलसल
ज़मीं-ता-आसमाँकितनेमसाइलहोगएहैं!
'नबील'आवाज़भीअपनीकहाँथीमुद्दतोंसे
जोतुमआएतोहमयक-लख़्तमहफ़िलहोगएहैं
  - Aziz Nabeel
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