na saa | न साथी है न मंज़िल का पता है

  - Asad Bhopali
साथीहैमंज़िलकापताहै
मोहब्बतरास्ताहीरास्ताहै
वफ़ाकेनामपरबर्बादहोकर
वफ़ाकेनामसेदिलकाँपताहै
मैंअबतेरेसिवाकिसकोपुकारूँ
मुक़द्दरसोगयाग़मजागताहै
वोसबकुछजानकरअंजानक्यूँँहैं
सुनाहैदिलकोदिलपहचानताहै
येआँसूढूँडताहैतेरादामन
मुसाफ़िरअपनीमंज़िलजानताहै
  - Asad Bhopali
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy