ishq ko jab husn se nazrein milaana aa gaya | इश्क़ को जब हुस्न से नज़रें मिलाना आ गया

  - Asad Bhopali
इश्क़कोजबहुस्नसेनज़रेंमिलानागया
ख़ुद-ब-ख़ुदघबराकेक़दमोंमेंज़मानागया
जबख़याल-ए-यारदिलमेंवालेहानागया
लौटकरगुज़राहुआकाफ़िरज़मानागया
ख़ुश्कआँखेंफीकीफीकीसीहँसीनज़रोंमेंयास
कोईदेखेअबमुझेआँसूबहानागया
ग़ुंचागुलमाहअंजुमसबकेसबबेकारथे
आपक्याआएकिफिरमौसमसुहानागया
मैंभीदेखूँअबतिराज़ौक़-ए-जुनून-ए-बंदगी
लेजबीन-ए-शौक़उनकाआस्तानागया
हुस्न-ए-काफ़िरहोगयाआमादा-ए-तर्क-ए-जफ़ा
फिर'असद'मेरीतबाहीकाज़मानागया
  - Asad Bhopali
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy