giran guzarne laga daur-e-intezaar mujhe | गिराँ गुज़रने लगा दौर-ए-इंतिज़ार मुझे

  - Asad Bhopali
गिराँगुज़रनेलगादौर-ए-इंतिज़ारमुझे
ज़राथपककेसुलादेख़याल-ए-यारमुझे
आयाग़मभीमोहब्बतमेंसाज़गारमुझे
वोख़ुदतड़पगएदेखाजोबे-क़रारमुझे
निगाह-ए-शर्मगींचुपकेसेलेउड़ीमुझको
पुकारताहीरहाकोईबारबारमुझे
निगाह-ए-मस्तयेमेयार-ए-बे-ख़ुदीक्याहै
ज़मानेवालेसमझतेहैंहोशियारमुझे
बजाहैतर्क-ए-त'अल्लुक़कामशवरालेकिन
इख़्तियारउन्हेंहैइख़्तियारमुझे
बहारऔरब-क़ैद-ए-ख़िज़ाँहैनंगमुझे
अगरमिलेतोमिलेमुस्तक़िलबहारमुझे
  - Asad Bhopali
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