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A R Sahil "Aleeg"
kyuuñ karte ho pareshaan apne zehn-o-ziya ko tum
kyuuñ karte ho pareshaan apne zehn-o-ziya ko tum | क्यूँ करते हो परेशाँ अपने ज़हन-ओ-ज़िया को तुम
- A R Sahil "Aleeg"
क्यूँ
करते
हो
परेशाँ
अपने
ज़हन-ओ-ज़िया
को
तुम
मैं
इक
मुद्दा
अनका
हूँ
समझ
में
नहीं
आऊँगा
- A R Sahil "Aleeg"
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शिकस्ता
नाव
समझ
कर
डुबोने
वाले
लोग
न
पा
सके
मुझे
साहिल
पे
खोने
वाले
लोग
ज़रा
सा
वक़्त
जो
बदला
तो
हम
पे
हँसने
लगे
हमारे
काँधे
पे
सर
रख
के
रोने
वाले
लोग
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Kashif Sayyed
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लाई
है
किस
मक़ाम
पे
ये
ज़िंदगी
मुझे
महसूस
हो
रही
है
ख़ुद
अपनी
कमी
मुझे
Ali Ahmad Jalili
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ख़ाक
आएँगे
हम
किसी
को
समझ
ख़ुद
को
हम
ख़ुद
समझ
नहीं
आते
Shajar Abbas
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ज़ोर
चलता
है
औरत
पे
सो
मर्द
ख़ुश
बीवी
पे
ख़त्म
मर्दानगी
की
समझ
Neeraj Neer
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इक
दूसरे
को
छोड़
के
जाने
की
बात
है
अपनी
नहीं
ये
सारे
ज़माने
की
बात
है
बस
यूँँ
समझ
लो
उन
सेे
मेरा
कद
बलंद
है
जिनके
लबों
पे
मुझको
गिराने
की
बात
है
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Kashif Sayyed
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समझ
के
आग
लगाना
हमारे
घर
में
तुम
हमारे
घर
के
बराबर
तुम्हारा
भी
घर
है
Hafeez Banarasi
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अब
बिछड़ने
पर
समझ
पाते
हैं
हम
इक
दूसरे
को
इम्तिहाँ
के
ख़त्म
हो
जाने
पे
हल
याद
आ
रहा
है
Nishant Singh
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ये
इश्क़
नहीं
आसाँ
इतना
ही
समझ
लीजे
इक
आग
का
दरिया
है
और
डूब
के
जाना
है
Jigar Moradabadi
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समझ
से
काम
जो
लेता
हर
एक
बशर
'ताबाँ'
न
हाहा-कार
ही
मचते
न
घर
जला
करते
Anwar Taban
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दोनों
हाथों
को
तेरे
हाथ
समझ
कर
जानाँ
अपने
गालों
पे
ख़ुद
ही
रंग
लगाया
मैंने
Upendra Bajpai
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दर
तलक
तो
गया
था
चोखट
से
वापस
पलट
आया
हम
अना
साथ
ले
आए
हाँ
मगर,
इश्क़
दफ़ना
कर
A R Sahil "Aleeg"
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शोर
है
सारे
मह-जबीनों
में
इक
नगीना
है
सौ
नगीनों
में
वो
शराफ़त
का
एक
पुतला
है
हाँ
मगर
साथ
के
कमीनों
में
सब
ने
मतलब
की
खींच
कर
सरहद
बाँट
दी
है
ज़मीं
ज़मीनों
में
मोड़
कर
मुँह
गया
जो
ये
दरिया
आग
दे
दी
गई
सफ़ीनों
में
अब
दिमाग़ों
में
ऐसे
है
नफ़रत
गोलियाँ
जैसे
मैगज़ीनों
में
मुझ
को
ख़तरा
तो
पैरहन
से
है
साँप
बैठे
है
आस्तीनों
में
हम
को
बस
शा'इरी
से
है
मतलब
आप
रहिएगा
नामचीनों
में
देखिए
दिल
दिमाग़
और
ये
इश्क़
जंग
जारी
है
कब
से
तीनों
में
खोटे
सिक्के
हैं
हम
बता
साहिल
कौन
रक्खेगा
अब
ख़ज़ीनों
में
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A R Sahil "Aleeg"
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इश्क़
में
वैसे
नामुमकिन
है
चश्म-ए-मिज़्गाँ
पाए
सुकूँ
कुछ
ख़्वाबों
को
बुन
लूँ
मैं
भी
नींद
अगर
आ
जाए
तो
A R Sahil "Aleeg"
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दे
गया
ज़ख़्म
वो
नासूर
इश्क़
में
हमको
यारों
वक़्त
हो
या
दु'आ
कोई,
न
भर
सकेगा
सुन
कोई
A R Sahil "Aleeg"
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इश्क़
का
है
ज़कात
और
सदका
ज़ुल्म
हँस
के
सहो
सनम
के
तुम
A R Sahil "Aleeg"
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