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A R Sahil "Aleeg"
ishq ka hai zakaat aur sadka
ishq ka hai zakaat aur sadka | इश्क़ का है ज़कात और सदका
- A R Sahil "Aleeg"
इश्क़
का
है
ज़कात
और
सदका
ज़ुल्म
हँस
के
सहो
सनम
के
तुम
- A R Sahil "Aleeg"
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एक
नया
'आशिक़
है
उसका,
जान
छिड़कता
है
उसपर
मुझको
डर
है
वो
भी
इक
दिन
मय-ख़ाने
से
निकलेगा
Siddharth Saaz
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सुनो
हर-वक़्त
इतना
याद
भी
मत
कीजिए
हमको
कहीं
ऐसा
न
हो
की
हिचकियों
में
जाँ
निकल
जाए
Sandeep dabral 'sendy'
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तेरा
पीछा
करते
करते
जाने
क्यूँ
मैं
दुनियादारी
से
पीछे
छूट
गया
तूने
तो
ऐ
जान
महज़
दिल
तोड़ा
था
तू
क्या
जाने
मैं
अंदर
तक
टूट
गया
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Ritesh Rajwada
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ज़्यादा
मीठा
हो
तो
चींटा
लग
जाता
है
सच्चे
इश्क़
को
अक्सर
बट्टा
लग
जाता
है
हमने
अपनी
जान
गंवाई
तब
जाना
भाव
मिले
तो
कुछ
भी
सट्टा
लग
जाता
है
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Ritesh Rajwada
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तुम्हें
हुस्न
पर
दस्तरस
है
मोहब्बत
वोहब्बत
बड़ा
जानते
हो
तो
फिर
ये
बताओ
कि
तुम
उस
की
आँखों
के
बारे
में
क्या
जानते
हो
ये
जुग़राफ़िया
फ़ल्सफ़ा
साईकॉलोजी
साइंस
रियाज़ी
वग़ैरा
ये
सब
जानना
भी
अहम
है
मगर
उस
के
घर
का
पता
जानते
हो
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Tehzeeb Hafi
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शाम-ए-फ़िराक़
अब
न
पूछ
आई
और
आ
के
टल
गई
दिल
था
कि
फिर
बहल
गया
जाँ
थी
कि
फिर
सँभल
गई
Faiz Ahmad Faiz
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बहुत
पहले
से
उन
क़दमों
की
आहट
जान
लेते
हैं
तुझे
ऐ
ज़िंदगी
हम
दूर
से
पहचान
लेते
हैं
Firaq Gorakhpuri
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अपने
होटों
की
ये
तहरीर
रखो
अपने
पास
हम
वो
'आशिक़
हैं
जो
आँखों
को
पढ़ा
करते
हैं
Meem Alif Shaz
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चाहे
हो
आसमान
पे
चाहे
ज़मीं
पे
हो
वहशत
का
रक़्स
हम
ही
करेंगे
कहीं
पे
हो
दिल
पर
तुम्हारे
नाम
की
तख़्ती
लगी
न
थी
फिर
भी
ज़माना
जान
गया
तुम
यहीं
पे
हो
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Nirmal Nadeem
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इक
ये
भी
तो
अंदाज़-ए-इलाज-ए-ग़म-ए-जाँ
है
ऐ
चारागरो
दर्द
बढ़ा
क्यूँँ
नहीं
देते
Ahmad Faraz
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इश्क़
में
मेरे
क़रीब
और
ही
आता
है
कोई
इश्क़
की
मुझ
को
सज़ा
और
सुनाता
है
कोई
A R Sahil "Aleeg"
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रहे
क़ाएम-ओ-दाइम
अहद-ओ-पैमाँ
पर
कहाँ
मिलते
हैं
ऐसे
नस्ल-ए-आदम
अब
A R Sahil "Aleeg"
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आज
भी
तू
उस
ग़ज़ाला
का
ही
है
कहते
हैं
सब
लोग
हाल
मेरा
क्या
हुआ
है
इश्क़
में
सब
से
अयाँ
है
A R Sahil "Aleeg"
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इश्क़
करना
था
किया
दिल
ने
चलाई
अपनी
मशवरे
रास
न
आए
किसी
फ़रज़ाने
के
A R Sahil "Aleeg"
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क्यूँ
करते
हो
परेशाँ
अपने
ज़हन-ओ-ज़िया
को
तुम
मैं
इक
मुद्दा
अनका
हूँ
समझ
में
नहीं
आऊँगा
A R Sahil "Aleeg"
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