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anupam shah
ham zara behyaal hote hain
ham zara behyaal hote hain | हम ज़रा बेख़याल होते हैं
- anupam shah
हम
ज़रा
बेख़याल
होते
हैं
हम
सेे
जब
भी
सवाल
होते
हैं
झूठ
कहते
हुए
नहीं
डरते
लोग
कितने
कमाल
होते
हैं
- anupam shah
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आगे
चलकर
जिस
सेे
शादी
करनी
हो
पहले
दिन
से
झूठ
नहीं
कहते
उस
सेे
Tanoj Dadhich
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दिल-ओ-नज़र
को
अभी
तक
वो
दे
रहे
हैं
फ़रेब
तसव्वुरात-ए-कुहन
के
क़दीम
बुत-ख़ाने
Ali Sardar Jafri
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वो
झूठ
बोल
रहा
था
बड़े
सलीक़े
से
मैं
एतिबार
न
करता
तो
और
क्या
करता
Waseem Barelvi
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तुम
इन
लबों
की
हँसी
और
ख़ुशी
पे
मत
जाना
ये
रोज़
रोज़
हमें
भी
फ़रेब
देते
हैं
Shadab Asghar
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मेहनत
तो
करता
हूँ
फिर
भी
घर
ख़ाली
है
बाबूजी
मिट्टी
के
कुछ
दीपक
ले
लो
दीवाली
है
बाबूजी
मिट्टी
बेच
रहा
हूँ
जिस
में
कोई
जाल
फ़रेब
नहीं
सोना
चाँदी
दूध
मिठाई
सब
जा'ली
है
बाबूजी
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Gyan Prakash Akul
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तुमको
हम
ही
झूठ
लगेंगे
लेकिन
दरिया
झूठा
है
पहले
हमको
चाँद
मिला
था
फिर
दरिया
को
चाँद
मिला
Abhishar Geeta Shukla
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बस
एक
लम्हे
के
सच
झूट
के
एवज़
'फ़रहत'
तमाम
उम्र
का
इल्ज़ाम
ले
गया
मुझ
से
Farhat Abbas Shah
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वो
आफ़ताब
लाने
का
देकर
हमें
फ़रेब
हम
सेे
हमारी
रात
के
जुगनू
भी
ले
गया
Rajesh Reddy
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नज़ारे
झूठ
लगते
हैं
किनारे
झूठ
लगते
है
अभी
तेरे
बिना
ये
चाँद
तारे
झूठ
लगते
हैं
Umesh Maurya
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सँभलता
हूँ
तो
ये
लगता
है
जैसे
तुम्हारे
साथ
धोखा
कर
रहा
हूँ
Shariq Kaifi
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कुछ
तिश्नगी
भी
ऐसे
मिटती
नहीं
हमारी
हक़
में
नहीं
समुंदर
के
प्यास
को
बुझाना
anupam shah
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मिरी
नज़्मों
में
ख़ुद
को
चाँद
पढ़कर
मत
यूँँ
इतराना
कि
तुम
सेे
इश्क़
करना
और
निभाना
है
हुनर
मेरा
anupam shah
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खुले
लब
और
दो
आँखें
ज़रा
सी
अधखुली
सी
थीं
कि
ऐसे
हादसे
में
मैं
गुज़र
जाता
तो
अच्छा
था
anupam shah
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जाने
का
जो
ग़म
होता
है
तेज
कभी
मद्धम
होता
है
तुम
सेे
बिछड़कर
जाना
हमने
आँख
का
आँसू
नम
होता
है
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anupam shah
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मोहब्बत
में
इज़ाफ़ा
हो
रहा
है
मगर
ख़र्चा
ज़ियादा
हो
रहा
है
anupam shah
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