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anupam shah
ho ga.e behosh bekud aur besudh ishq men
ho ga.e behosh bekud aur besudh ishq men | हो गए बेहोश बेख़ुद और बेसुध इश्क़ में
- anupam shah
हो
गए
बेहोश
बेख़ुद
और
बेसुध
इश्क़
में
इस
से
ज़्यादा
क्या
डुबोयेगी
हमें
ये
मयकशी
- anupam shah
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इक
कली
की
पलकों
पर
सर्द
धूप
ठहरी
थी
इश्क़
का
महीना
था
हुस्न
की
दुपहरी
थी
ख़्वाब
याद
आते
हैं
और
फिर
डराते
हैं
जागना
बताता
है
नींद
कितनी
गहरी
थी
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Vikram Gaur Vairagi
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सर्दी
और
गर्मी
के
उज़्र
नहीं
चलते
मौसम
देख
के
साहब
इश्क़
नहीं
होता
Moin Shadab
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इश्क़
हो
जाए
किसी
से
कोई
चारा
तो
नहीं
सिर्फ़
मुस्लिम
का
मोहम्मद
पे
इजारा
तो
नहीं
Kunwar Mohinder Singh Bedi Sahar
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बिना
इस
इश्क़
के
कैसे
गुज़ारा
हो
ज़रूरी
है
कि
हो
ये
इश्क़
दोबारा
Abhay Aadiv
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लड़
सको
दुनिया
से
जज़्बों
में
वो
शिद्दत
चाहिए
इश्क़
करने
के
लिए
इतनी
तो
हिम्मत
चाहिए
कम
से
कम
मैंने
छुपा
ली
देख
कर
सिगरेट
तुम्हें
और
इस
लड़के
से
तुमको
कितनी
इज़्ज़त
चाहिए
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Nadeem Shaad
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बख़्शी
हैं
हम
को
इश्क़
ने
वो
जुरअतें
'मजाज़'
डरते
नहीं
सियासत-ए-अहल-ए-जहाँ
से
हम
Asrar Ul Haq Majaz
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सुनते
हैं
इश्क़
नाम
के
गुज़रे
हैं
इक
बुज़ुर्ग
हम
लोग
भी
फ़क़ीर
इसी
सिलसिले
के
हैं
Firaq Gorakhpuri
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हुस्न
को
शर्मसार
करना
ही
इश्क़
का
इंतिक़ाम
होता
है
Asrar Ul Haq Majaz
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इश्क़
अगर
बढ़ता
है
तो
फिर
झगड़े
भी
तो
बढ़ते
हैं
आमदनी
जब
बढ़ती
है
तो
ख़र्चे
भी
तो
बढ़ते
हैं
माना
मंज़िल
नहीं
मिली
है
हमको
लेकिन
रोज़ाना
एक
क़दम
उसकी
जानिब
हम
आगे
भी
तो
बढ़ते
हैं
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Tanoj Dadhich
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गुदाज़-ए-इश्क़
नहीं
कम
जो
मैं
जवाँ
न
रहा
वही
है
आग
मगर
आग
में
धुआँ
न
रहा
Jigar Moradabadi
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परिंदा
फड़फड़ाना
चाहता
है
क़फ़स
को
तोड़
देना
चाहता
है
हदों
ने
कर
दिया
इसको
अपाहिज
हदों
से
पार
जाना
चाहता
है
मनाने
में
जिसे
सदियाँ
लगी
थी
वो
मुझ
सेे
रूठ
जाना
चाहता
है
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anupam shah
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ज़िन्दगी
इस
तरह
ही
लुटाता
रहा
प्यार
खोता
रहा
प्यार
पाता
रहा
एक
मंज़र
ने
यूँँ
रोक
दी
ज़िंदगी
बारहा
सामने
मेरे
आता
रहा
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anupam shah
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दु'आ
अपनी
भी
ख़ातिर
इस
तरह
कुछ
माँग
ली
मैंने
ये
चाहा
है
कि
तेरे
चाहने
वाले
सभी
ख़ुश
हो
anupam shah
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हैं
जो
बातें
ये
बस
ख़याली
हैं
और
फिर
हाथ
भी
तो
ख़ाली
हैं
anupam shah
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मुझे
हर
हाथ
ने
कुछ
इस
तरह
से
अब
तराशा
है
न
मुझ
में
रह
गया
हूँ
मैं
कहीं
बाक़ी
मिरे
जैसा
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anupam shah
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