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anupam shah
aankh ke motiyon ko na zaayaa' karo
aankh ke motiyon ko na zaayaa' karo | आँख के मोतियों को न ज़ाया' करो
- anupam shah
आँख
के
मोतियों
को
न
ज़ाया'
करो
अश्क़
यूँँ
ही
न
अपने
बहाएा
करो
खलवतों
में
है
जीने
की
बस
ये
अदा
आइना
देखकर
मुस्कुराया
करो
लिख
दिया
चाँद
को
तुमने
क्यूँ
दिल
मिरा
चाँद
को
इतना
सर
न
चढ़ाया
करो
बांधकर
उँगलियों
से
मेरी
उँगलियाँ
प्यार
बढ़ता
है
इसको
बढ़ाया
करो
जोड़कर
ज़िन्दगी
से
मेरी
ज़िंदगी
जो
है
आधा
उसे
तुम
सवाया
करो
बात
करने
का
है
इक
सलीक़ा
यही
एक
सुन
कर
के
दूजी
सुनाया
करो
यूँँ
करो
संग
मेरे
ज़रा
सा
चलो
इस
तरह
से
न
हमको
पराया
करो
आपके
लब
प'
है
मिस्रियों
की
डली
कोई
वा'दा
करो
तो
निभाया
करो
- anupam shah
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मुझ
सेे
वा'दा
करने
वाले
वा'दा
करके
भूल
गए
अच्छा
ख़ासा
पीतल
था
मैं
सोना
करके
भूल
गए
Tanoj Dadhich
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उसने
गले
से
हमको
लगाया
तो
रो
पड़े
अपना
बना
के
हाथ
छुड़ाया
तो
रो
पड़े
मैंने
ग़मों
से
कह
तो
दिया
रहना
उम्र
भर
वा'दा
ग़मों
ने
अपना
निभाया
तो
रो
पड़े
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Vikas Sahaj
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सुबूत
है
ये
मोहब्बत
की
सादा-लौही
का
जब
उस
ने
वा'दा
किया
हम
ने
ए'तिबार
किया
Josh Malihabadi
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वा'दा
करो
कि
हाथ
छुड़ाकर
न
जाओगे
वा'दा
करो
कि
सात
जनम
तक
रहेगा
इश्क़
Mukesh Jha
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जहाँ
तक
भाग
पाओ
मौत
हम
सेे
भाग
लो
लेकिन
हमारा
वा'दा
है
इक
दिन
तुम्हें
अपना
करेंगे
हम
Gautam Raj 'Dheeraj'
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'ताहिर'
उन
बे-बस
लम्हों
का
अहद
निभाना
होगा
उस
ने
कहा
था
ख़त
मत
लिखना
ग़ज़लें
लिखते
रहना
Qayyum Tahir
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एक
वा'दा
कर
रहा
हूँ
आप
से
हर
किया
वा'दा
निभाऊँगा
सनम
Divy Kamaldhwaj
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यदि
अंधकार
से
लड़ने
का
संकल्प
कोई
कर
लेता
है
तो
एक
अकेला
जुगनू
भी
सब
अन्धकार
हर
लेता
है
Balkavi Bairagi
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मोहब्बत
वहीं
तक
है
सच्ची
मोहब्बत
जहाँ
तक
कोई
अहद-ओ-पैमाँ
नहीं
है
Arzoo Lakhnavi
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मन
में
एक
इरादा
होता
है
ताबिश
राजा
पहले
प्यादा
होता
है
ताबिश
मानता
हूँ
मजबूरियाँ
थीं
कुछ
दिक्कत
थी
पर
वा'दा
तो
वा'दा
होता
है
ताबिश
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Vishal Singh Tabish
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दिखाया
हौसला
इस
बार
कर
के
मोहब्बत
को
सरेबाज़ार
कर
के
हमारे
यार
छूटे
फिर
गए
तुम
अकेले
हो
गए
हैं
प्यार
कर
के
वो
ग़ुस्सा
कर
के
जाता
था
हमेशा
गया
है
इस
दफ़ा
वो
प्यार
कर
के
ख़रीदी
और
बेची
भावनाएं
इन्ही
रिश्तों
को
क्यूँँं
बाज़ार
करके
ये
इकतरफा
मोहब्बत
अब
न
होगी
अरे
हम
थक
गए
बेगार
कर
के
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anupam shah
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अभी
हम
सेे
रूठे
अभी
वो
ख़फ़ा
है
ज़बाँ
से
वो
अपनी
नहीं
बे-वफ़ा
है
हमारे
तो
जीने
का
ये
फ़लसफ़ा
है
न
कोई
ख़सारा
न
कोई
नफ़ा
है
तुम्हीं
याद
आना
न
आना
तुम्हारा
मोहब्बत
है
या
फिर
ये
कोई
जफ़ा
है
फ़ना
हो
चुके
हैं
मुहब्बत
में
हम
तो
ये
लाशों
का
सौदा
ही
अबकी
दफ़ा
है
बुरा
हो
भला
हो
तुम्हें
सोचते
हैं
कि
इस
सेे
बड़ी
भी
कहीं
कुछ
वफ़ा
है
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anupam shah
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वो
जब
भी
मिलने
आती
है,
तो
सामां
छोड़
जाती
है
मेरी
गर्दन
पे,
अपने
लब,
मिरी
जाँ
छोड़
जाती
है
anupam shah
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कुछ
दीवारों
पर
दरवाज़े
होते
हैं
कुछ
दरवाज़े
दीवारों
से
होते
हैं
anupam shah
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ज़रूरी
है
अगर
दीवार
होना
दरमियाँ
अपने
तो
इस
दीवार
में
तुम
एक
रौशनदान
भी
देना
anupam shah
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