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Anmol Mishra
bhed zaraa batla de jogi
bhed zaraa batla de jogi | भेद ज़रा बतला दे जोगी
- Anmol Mishra
भेद
ज़रा
बतला
दे
जोगी
जीवन
क्या
है
गा
दे
जोगी
मत्था
मेरा
हत्था
तेरा
नत्था
से
मिलवा
दे
जोगी
आँख
का
पानी
सूख
गया
है
कारे
घन
बरसा
दे
जोगी
नगरी
नगरी
खोज
रहा
है
कोई
गले
लगा
दे
जोगी
कितनी
बातें
भूल
गया
है
इतनी
और
भुला
दे
जोगी
- Anmol Mishra
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हमीं
तलाश
के
देते
हैं
रास्ता
सब
को
हमीं
को
बा'द
में
रस्ता
दिखाया
जाता
है
Varun Anand
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नहीं
हर
चंद
किसी
गुम-शुदा
जन्नत
की
तलाश
इक
न
इक
ख़ुल्द-ए-तरब-नाक
का
अरमाँ
है
ज़रूर
बज़्म-ए-दोशंबा
की
हसरत
तो
नहीं
है
मुझ
को
मेरी
नज़रों
में
कोई
और
शबिस्ताँ
है
ज़रूर
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Asrar Ul Haq Majaz
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मैं
अकेला
ही
चला
था
जानिब-ए-मंज़िल
मगर
लोग
साथ
आते
गए
और
कारवाँ
बनता
गया
Majrooh Sultanpuri
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शे'र
दर-अस्ल
हैं
वही
'हसरत'
सुनते
ही
दिल
में
जो
उतर
जाएँ
Hasrat Mohani
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नहीं
निगाह
में
मंज़िल
तो
जुस्तुजू
ही
सही
नहीं
विसाल
मुयस्सर
तो
आरज़ू
ही
सही
Faiz Ahmad Faiz
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अपनी
मंज़िल
पे
पहुँचना
भी
खड़े
रहना
भी
कितना
मुश्किल
है
बड़े
हो
के
बड़े
रहना
भी
Shakeel Azmi
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जिसे
मंज़िल
बताया
जा
रहा
था
वो
रस्ते
के
सिवा
कुछ
भी
नहीं
है
Atul K Rai
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उसकी
हसरत
है
जिसे
दिल
से
मिटा
भी
न
सकूँ
ढूँडने
उसको
चला
हूँ
जिसे
पा
भी
न
सकूँ
Ameer Minai
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कुछ
नज़र
आता
नहीं
उस
के
तसव्वुर
के
सिवा
हसरत-ए-दीदार
ने
आँखों
को
अंधा
कर
दिया
Haidar Ali Aatish
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हसरत
भरी
नज़र
से
तुझे
देखता
हूँ
मैं
जिसको
ये
खल
रहा
है
वो
आँखों
को
फोड़
ले
Shajar Abbas
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ख़ुद
ही
मारो
ख़ुद
ही
ख़ुद
में
मर
जाओ
ख़ुद
की
लाशें
ख़ुद
कंधों
पर
ढोते
नइंँ
Anmol Mishra
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आज
जवानी
ठोकर
खाकर
गिरती
है
बूढ़े
कंधे
बोझ
उठाए
चलते
हैं
Anmol Mishra
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कागज़ों
की
कश्ती
पर
दिल
के
ज़ख़्म
ढोते
हैं
हाथ
लगती
चीज़ों
को
हाथ
लगते
खोते
हैं
एक
दिन
अँधेरे
ने
आके
मुझ
सेे
बोला
ये
जो
उदास
रहते
नइँ
वो
उदास
होते
हैं
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Anmol Mishra
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सादे
काग़ज़
जैसा
जीवन
जीवन
जैसा
नइँ
होता
कुछ
न
सही
तो
टेढ़ी
मेढ़ी
खींच
लकीरें
काग़ज़
पर
Anmol Mishra
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तुम्हें
वो
मिल
नहीं
पाईं
उन्हें
तुम
मिल
नहीं
पाए
कन्हैया
साथ
में
क्यूँ
फिर
सदा
तस्वीर
दिखती
है
Anmol Mishra
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