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Anmol Mishra
aaj jawaani thokar khaakar girti hai
aaj jawaani thokar khaakar girti hai | आज जवानी ठोकर खाकर गिरती है
- Anmol Mishra
आज
जवानी
ठोकर
खाकर
गिरती
है
बूढ़े
कंधे
बोझ
उठाए
चलते
हैं
- Anmol Mishra
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अदब
ता'लीम
का
जौहर
है
ज़ेवर
है
जवानी
का
वही
शागिर्द
हैं
जो
ख़िदमत-ए-उस्ताद
करते
हैं
Chakbast Brij Narayan
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ज़हीफ़ी
इस
लिए
मुझको
सुहानी
लग
रही
है
इसे
कमाने
में
पूरी
जवानी
लग
रही
है
नतीजा
ये
है
कि
बरसों
तलाश-ए-ज़ात
के
बाद
वहाँ
खड़ा
हूँ
जहाँ
रेत
पानी
लग
रही
है
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Khalid Sajjad
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मिरी
वफ़ा
का
तिरा
लुत्फ़
भी
जवाब
नहीं
मिरे
शबाब
की
क़ीमत
तिरा
शबाब
नहीं
Asrar Ul Haq Majaz
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ये
जो
ढलती
हुई
जवानी
है
हर
नए
साल
की
कहानी
है
देख
आँखें
मेरी
बता
मुझको
इस
में
किस
नाम
की
निशानी
है
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Aman Mishra 'Anant'
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रात
भी
नींद
भी
कहानी
भी
हाए
क्या
चीज़
है
जवानी
भी
Firaq Gorakhpuri
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बचपना
ऐ
लड़को
तुम
सेे
कभी
छूटता
ही
नहीं
जवान
होना
तो
बस
लड़कियों
को
आता
है
Kumar Vishwas
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सैर
कर
दुनिया
की
ग़ाफ़िल
ज़िंदगानी
फिर
कहाँ
ज़िंदगी
गर
कुछ
रही
तो
ये
जवानी
फिर
कहाँ
Khwaja Meer Dard
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लुटा
दी
है
जवानी
जिसने
अपना
घर
बनाने
में
वही
बूढ़ा
हुआ
तो
घर
से
बेघर
हो
गया
है
अब
Nirbhay Nishchhal
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जीने
का
इरादा
है
मगर
फिर
भी
कहीं
से
कोई
तो
इशारा
हो
मिरा
अज़्म
जवाँ
हो
Sohit Singla
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लोग
हर
मोड़
पे
रुक
रुक
के
सँभलते
क्यूँँ
हैं
इतना
डरते
हैं
तो
फिर
घर
से
निकलते
क्यूँँ
हैं
मोड़
होता
है
जवानी
का
सँभलने
के
लिए
और
सब
लोग
यहीं
आ
के
फिसलते
क्यूँँ
हैं
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Rahat Indori
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बहुत
वो
दूर
हैं
हम
सेे
और
अब
हम
काश
हैं
उनके
सुना
है
कल
जो
मेरे
ख़ास
थे
अब
पास
हैं
उनके
Anmol Mishra
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तेरे
हर
फ़न
पर
लानत
है
तेरे
जीवन
पर
लानत
है
गीत
ग़ज़ल
कविता
नज़्मों
पर
तेरे
हर
धन
पर
लानत
है
मरने
की
कोशिश
में
ज़िंदा
इस
मुर्दा
तन
पर
लानत
है
जिसने
तेरी
शक्ल
छिपाई
बैरी
चिलमन
पर
लानत
है
हाथ
मिलाकर
यार
कहा
था
ऐसे
दुश्मन
पर
लानत
है
हल्के
झोंके
में
टूटा
जो
नाज़ुक
बंधन
पर
लानत
है
फ़िक्र
नहीं
जिस
में
दुनिया
की
उस
पागलपन
पर
लानत
है
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Anmol Mishra
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क़ीमती
स्याही
भरी
जिस
जिस
क़लम
में
आँसुओं
की
वक़्त
पे
वो
भूल
बैठे
ये
ग़लत
ये
ठीक
सा
है
बोलते
थे
बोल
जो
ता'रीफ़
में
हर
रोज़
मेरी
एक
दिन
वो
बोल
बैठे
आपकी
ता'रीफ़
क्या
है
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Anmol Mishra
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आओ
बैठो
मेरे
घर
में
सहते
ढहते
इस
खंडर
में
बाहर
आंँधी
बिजली
चमके
अंदर
आओ
इस
मंज़र
में
पीठ
हुई
क्यूँँंँ
गीली
मेरी
ख़ून
लगा
था
क्या
ख़ंजर
में
खोया
तुमने
प्यार
भरोसा
ढूंँढो
गुम
है
किस
जर्जर
में
तूने
जिस
सेे
प्रेम
किया
था
वो
तो
छूट
गया
नइहर
में
जोगी
धूल
उड़ाकर
बोला
माटी
डालो
इस
बंजर
में
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Anmol Mishra
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जो
टूट
बैठे
थकन
के
मारे
जो
हार
बैठे
हैं
आधे
रस्ते
सुनो
ऐ
मंज़िल
ज़रा
बिचारों
के
पास
आओ
गले
लगाओ
Anmol Mishra
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