falak ke na in maah-paaron ko dekho | फ़लक के न इन माह-पारों को देखो

  - Anand Narayan Mulla
फ़लककेइनमाह-पारोंकोदेखो
जोमिट्टीमेंहैंउनसितारोंकोदेखो
कभीकारवाँभीनुमूदारहोगा
निगाहेंजमाएग़ुबारोंकोदेखो
निकलकरकभीशहर-ए-सूद-ओ-ज़ियाँसे
मोहब्बतकेउजड़ेदयारोंकोदेखो
चमनमेंयेकिसचालसेचलरहेहो
फूलोंकोदेखोख़ारोंकोदेखो
ज़बाँहुस्नकीमो'तबरकबहुईहै
किनायोंकोसमझोइशारोंकोदेखो
मुसल्लेहक़तारेंइधरभीउधरभी
ज़राअम्नकीराह-गुज़ारोंकोदेखो
चमनकीख़िज़ाँपरआँसूबहाओ
नज़रहैतोकलकीबहारोंकोदेखो
देखोदरख़्तोंकीदूरीचमनमें
लिपटतीहुईशाख़-सारोंकोदेखो
ज़राझाँककरग़ुर्फ़ा-ए-मयकदास
तरसतेलबोंकीक़तारोंकोदेखो
किसीकेसितमकोभीसमझतेतवज्जोह
अरेइनतग़ाफ़ुलकेमारोंकोदेखो
वोदौर-ए-हयात-ए-जहाँगयाहै
भँवरमेंरहोऔरकिनारोंकोदेखो
बढ़ोऔरहाथोंकाइकपलबनालो
किनारोंसेकबतकसवारोंकोदेखो
बिना-ए-बक़ाधमकीयोंपरफ़नाकी
नएजगकेपरवरदिगारोंकोदेखो
कभीनाम-ए-'मुल्ला'आयाज़बाँतक
येदुनियाहै'मुल्ला'केयारोंकोदेखो
  - Anand Narayan Mulla
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