dekha kuchh aaj yuñ kisi ghaflat-shi'aar ne | देखा कुछ आज यूँँ किसी ग़फ़लत-शिआ'र ने

  - Anand Narayan Mulla
देखाकुछआजयूँँकिसीग़फ़लत-शिआ'रने
मैंअपनीउम्र-ए-रफ़्ताकोदौड़ापुकारने
हंगामा-ए-शबाबकीपोंछोसर-गुज़श्त
अपनेचमनकोलूटलियाख़ुदबहारने
पैकान-ए-तीरज़हरमेंइतनेबुझेथे
कुछऔरकरदियाहैनज़रकोख़ुमारने
तम्मत-ब-ख़ैरदिलकीशिकायतकीदास्ताँ
होंटोंकोसीदियानिगह-ए-शर्मसारने
हिम्मतपड़ीशैख़सेकहनेकीमोहतसिब
आएहोइकग़रीबपेग़ुस्साउतारने
वोतोकहोकिआईक़फ़सतकभीबू-ए-गुल
वर्नाभुलादियाथाहमेंतोबहारने
जोतंग-ए-गुलथेतुर्रा-ए-दस्तारबनगए
जोगुलथेआएतुर्बत-ए-बे-कससँवारने
आएहोक्यातुम्हींमुझेआवाज़दोज़रा
आँखोंकानूरछीनलियाइंतिज़ारने
आलाम-ए-रोज़गारसे'मुल्ला'कोक्याग़रज़
अपनाबनालियाहैउसेचश्म-ए-यारने
  - Anand Narayan Mulla
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