ab apne deeda-o-dil ka bhi e'tibaar nahin | अब अपने दीदा-ओ-दिल का भी ए'तिबार नहीं

  - Anand Narayan Mulla
अबअपनेदीदा-ओ-दिलकाभीए'तिबारनहीं
उसीकोप्यारकियाजिसकेदिलमेंप्यारनहीं
नहींकिमुझकोतबीअ'तपेइख़्तियारनहीं
हरइकजामसेपीलूँवोबादा-ख़्वारनहीं
हरएकगामपेकाँटोंकीहैंकमीं-गाहें
शबाबआहशगूफ़ोंकीरहगुज़ारनहीं
भरीहुईहैवोकाम-ओ-दहनमेंतल्ख़ी-ए-ज़ीस्त
किलबपेजाम-ए-मोहब्बतभीख़ुश-गवारनहीं
मेरेअश्कोंसेदामनपेतेरेआएगीआँच
येशो'ला-रूहैंमगरफ़ितरत-ए-शरारनहीं
कहींछुपाएसेछुपतीभीहैहक़ीक़त-ए-ग़म
वोग़महीक्याजोमसर्रतसेआश्कारनहीं
मैंतेरीयादसेबहकाचुकाहूँयूँँदिलको
किअबमुझेतिरीफ़ुर्क़तभीनागवारनहीं
मिरेसुकूँकेलिएक्यूँँयेकोशिश-ए-पैहम
क़रारछीननेवालेतुझेक़रारनहीं
जहान-ए-अक़्लकेनफ़रत-कदोंमेंबटजाता
हज़ारशुक्रमोहब्बतपेइख़्तियारनहीं
किसीकीलूटकेराहतख़ुशीनहींमिलती
ख़िज़ाँकेहाथमेंसर्माया-ए-बहारनहीं
निगाह-ए-दोस्तकोइसकीभीहैख़बरलेकिन
वोराज़जिसकाअभीदिलभीराज़दारनहीं
तवज्जा-ए-निगह-ए-यारकासबबमा'लूम
दिल-ए-गिरफ़्ता-ए-'मुल्ला'अभीशिकारनहीं
  - Anand Narayan Mulla
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