har jalwe pe nigaah ki.e ja raha hooñ main | हर जल्वे पे निगाह किए जा रहा हूँ मैं

  - Anand Narayan Mulla
हरजल्वेपेनिगाहकिएजारहाहूँमैं
आँखोंकोख़िज़्र-ए-राहकिएजारहाहूँमैं
मिटनेपाएताज़गी-ए-लज़्ज़त-ए-गुनाह
तौबाभीगाहगाहकिएजारहाहूँमैं
कैसीयेज़िंदगीहैकिफिरभीहैशौक़-ए-ज़ीस्त
गौहर-नफ़सइकआहकिएजारहाहूँमैं
अश्कोंकीमशअ'लोंकोफ़रोज़ाँकिएहुए
तयइल्तिजाकीराहकिएजारहाहूँमैं
ख़ुदजिसकेसामनेसिपर-अंदाख़्ताहैहुस्न
ऐसीभीइकनिगाहकिएजारहाहूँमैं
शायदकभीवोभूलकेरक्खेंइधरक़दम
आँखोंकोफ़र्श-ए-राहकिएजारहाहूँमैं
बढ़तीहीजारहीहैंतिरीकम-निगाहियाँ
क्यादिलमेंतेरेराहकिएजारहाहूँमैं
ज़ुलमात-ए-दैर-ओ-का'बामेंकुछरौशनीसीहै
शायदकोईगुनाहकिएजारहाहूँमैं
'मुल्ला'हरएकताज़ामुसीबतपेहँसकेऔर
कजगोशा-ए-कुलाहकिएजारहाहूँमैं
  - Anand Narayan Mulla
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy