armaan ko chhupaane se museebat men hai jaañ aur | अरमाँ को छुपाने से मुसीबत में है जाँ और

  - Anand Narayan Mulla
अरमाँकोछुपानेसेमुसीबतमेंहैजाँऔर
शोलेकोदबातेहैंतोउठताहैधुआँऔर
इंकारकिएजाओइसीतौरसेहाँऔर
होंटोंपेहैकुछऔरनिगाहोंसेअयाँऔर
ख़ुदतूनेबढ़ाईहैयेतफ़रीक़-ए-जहाँऔर
तूएकमगररूपयहाँऔरवहाँऔर
दिलमेंकोईग़ुंचाकभीखिलतेनहींदेखा
इसबाग़मेंक्याकेबनालेगीख़िज़ाँऔर
इतनाभीमिरेअहद-ए-वफ़ापरकरोशक
हाँहाँमैंसमझताहूँकिहैरस्म-ए-जहाँऔर
हरलबपेतिरानामहैइकमैंहूँकिचुपहूँ
दुनियाकीज़बाँऔरहै'आशिक़कीज़बाँऔर
अबकोईसदामेरीसदापरनहींदेता
आवाज़-ए-तरबऔरथीआवाज़-ए-फ़ुग़ाँऔर
कुछदूरपेमिलतीहैंहदेंअर्ज़-ओ-समाकी
सहरा-ए-तलबमेंनहींमंज़िलकानिशाँऔर
इकआहऔरइकअश्कपेहैक़िस्सा-ए-दिलख़त्म
रखतीनहींअल्फ़ाज़-ए-मोहब्बतकीज़बाँऔर
वोसुब्हकेतारेकीझपकनेसीलगीआँख
कुछदेरज़रादीदा-ए-अंजुम-निगराँऔर
'मुल्ला'वहीतुमऔरवहीकू-ए-हसीनाँ
जैसेकभीदुनियामेंथाकोईजवाँऔर
  - Anand Narayan Mulla
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