aaina-e-rangeen-e-jigar kuchh bhi nahin kya | आईना-ए-रंगीन-ए-जिगर कुछ भी नहीं क्या

  - Anand Narayan Mulla
आईना-ए-रंगीन-ए-जिगरकुछभीनहींक्या
क्याहुस्नहीसबकुछहैनज़रकुछभीनहींक्या
चश्म-ए-ग़लत-अंदाज़केशायाँभीठहरे
जज़्ब-ए-ग़म-ए-पिन्हाँमेंअसरकुछभीनहींक्या
नज़रेंहैंकिसीकीकिहैइकआतिश-ए-सय्याल
यूँँआगलगानेमेंख़तरकुछभीनहींक्या
अदनासाइशाराभीहैजिसकामुझेइकहुक्म
उसपरमिरीआहोंकाअसरकुछभीनहींक्या
मानामिरेजलनेसेआँचआएगीतुमपर
लेकिनमिरेजलनेमेंज़ररकुछभीनहींक्या
यूँँभीकोईदुनियाकीनिगाहोंसेगिरजाए
'मुल्ला'कोबुराकहनेमेंडरकुछभीनहींक्या
  - Anand Narayan Mulla
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